Friday, March 22, 2013

इतना भी न आजमा इस हार को ए जिंदगी
के जीतके जश्नने से हमे यु खौफासा लगने लगे
-------------------------------------------------
असावी त्यालाही बहुदा माणसांची शिवाशिव 
लांबूनच न्याहाळतो सार आभाळातून देवबिव..
-------------------------------------------------
तुझ्या सुरांनी भारून जावी वार्यावरची गाणी 
खुल्या आसमंती लहरत जावी मनामनातील गाणी
-------------------------------------------------
चिमुरड्या मुठीत उमलणारी पोतभर स्वप्न 
आभाळाशी नात सांगणारी नवजात स्वप्न
-------------------------------------------
कुछ इस तरह चुभते अपने, गैरोके इस मुल्क मे 
के भीड के चेहरे पे भी अब खौफसा दिखता है
-----------------------------------------
हातभर ओंजळीत विसावलय वितभर आभाळ 
कोर कोर चंद्र मिरवतय निळ्या नदीच कपाळ
--------------------------------------------
इक मोड पे युही बदल गयी जिंदगी
उल्झानो के दायारोमे बस सिमट गयी जिंदगी
-----------------------------------------
नकळत उमगत जाते मुक्या थेंबांची बोलकी भाषा 
कधी अंतरांची रुजवात तर कधी अर्थ शेवटचा
-------------------------------------------------
कुठे तुझी सुरुवात अन कुठे तुझा अंत 
माणसाचा जन्म परी तुला माणुसकीची भ्रांत
-------------------------------------------------
मनमनात अवघडलेला तो ओलाचिंब कोपरा
क्षणक्षणास मोह ज्याचा तो दरवळ्लेला कोपरा
--------------------------------------------------
बेनाम हि रहने दो हमे इस रिश्तो के भवर मे
के दिवानगी का हर चेहरा यहा बदनामसा लगता है

No comments:

Post a Comment