मुठीत इवली स्वप्न अन खर्या जगण्याचं व्याज
एक पावसाळी रात्र काल ठेवली गहाण
-------------------------------------------------
वरवर बघता दिसतीलहि येथे सप्तरंगी मुखवटे सुखाचे
जमेल ना देवा तुलाही लपवणे ओघळ असे दु:खाचे..
-------------------------------------------------
जाण्यार्याला अस पाठमोर टोकू नये ग ...
भरल्या घरात कशाच ग इतक रडू ?
संध्याकाळ अशी उदास नसावी ग ...
देवी तथास्तु म्हणत फिरते बघ घराघरातुन ..
लहानपणी आजी सांगायची अस काही बाही ...
....खर खोट देव जाने .....
..मोठ होता होता सगळच विसरायला झालय आताशा..
जाऊदे जे होत ते भल्यासाठीच...
(हे पण आजीनेच सांगितलय न)
-----------------------------------------
येता येता त्या क्षणाने असहि यावे
जुन्याच दोघांना दुनियेने नव्या नात्याने ओळखावे-
------------------------------------------------
आधार सावल्यांचे असू दे तुझ्या उशाशी
काळ्या रात्रीत उफाळते वैर त्या प्रश्नांचे ह्या उत्तरांशी
--------------------------------------------
होती तशी ठाऊक मजला
कथा अवघड वळणांची
सरळ सोटं मार्ग जगण्याचा
तरी मना बोच व्यथेची
--------------------------------------------
बदलांचे वारे सुरु झालेत...
सोसण्याचे बळ दे...
बदलताहेत नात्यांच्या परिभाषा.
.मनाला सावरण्याचे भान दे
एक पावसाळी रात्र काल ठेवली गहाण
-------------------------------------------------
वरवर बघता दिसतीलहि येथे सप्तरंगी मुखवटे सुखाचे
जमेल ना देवा तुलाही लपवणे ओघळ असे दु:खाचे..
-------------------------------------------------
जाण्यार्याला अस पाठमोर टोकू नये ग ...
भरल्या घरात कशाच ग इतक रडू ?
संध्याकाळ अशी उदास नसावी ग ...
देवी तथास्तु म्हणत फिरते बघ घराघरातुन ..
लहानपणी आजी सांगायची अस काही बाही ...
....खर खोट देव जाने .....
..मोठ होता होता सगळच विसरायला झालय आताशा..
जाऊदे जे होत ते भल्यासाठीच...
(हे पण आजीनेच सांगितलय न)
-----------------------------------------
येता येता त्या क्षणाने असहि यावे
जुन्याच दोघांना दुनियेने नव्या नात्याने ओळखावे-
------------------------------------------------
आधार सावल्यांचे असू दे तुझ्या उशाशी
काळ्या रात्रीत उफाळते वैर त्या प्रश्नांचे ह्या उत्तरांशी
--------------------------------------------
होती तशी ठाऊक मजला
कथा अवघड वळणांची
सरळ सोटं मार्ग जगण्याचा
तरी मना बोच व्यथेची
--------------------------------------------
बदलांचे वारे सुरु झालेत...
सोसण्याचे बळ दे...
बदलताहेत नात्यांच्या परिभाषा.
.मनाला सावरण्याचे भान दे