Sunday, January 6, 2013

मनमनास ठाऊक अवघ्या दिशा वादळांच्या 
कासावीस जीव तरी शोधे चोरवाटा भरकटण्याच्या....

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शोध मीपणाचा आजन्म पुरलेला
सावल्यांच्या दिशांचाही इथे अंदाज चुकलेला
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क्षितिजाच्या उंबरठ्याशी तळव्यात तेजाचे दान 
मिणमिणत्या सावल्यानाही गर्द काळोखाचे भान
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मन उनाड उनाड 
घेई शोध अस्तित्वाचा 
पावलापावलावर अवघडलेल्या 
ह्या वाटा भरकटण्याच्या
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घे आडोश्याला जरासे तू हे पसारे वेदनेचे 
उठतील चहूदिशांनी बघ आता मोहोळ सांत्वनांचे
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उठता रान चाहुलींचे , मनी हुरहुरते वादळ 
ओझरत्या स्पर्शालाही उगा भास मोहरण्याचा
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रात्रीच्या गर्भातली प्रकाशाची रुजवण तू 
अवसेच्या रानातली जणू काजव्यांची माळ तू..
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मौनाच्या वेदनेतला हूळहूळता हुंकार तू 
ओरखड्यांच्या नक्षीतला कधी तृप्ततेचा ओघळ तू
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स्वप्न अन सत्यातला खराखुरा आभास तू 
घट्ट मिठीत काळाच्या सुटकेचा निश्वास तू...
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