पडझडीचे अवशेष सारे मनातच विरघळू दे
ऐलतीराचा पैल तीराशी संवाद नव्याने होऊ दे
----------------------------------------------
सुख झाले अळणी देवा दु:खाची तू चिमुट दे
साजर्या जगण्यास माझ्या तू काजळाची तीट दे
-----------------------------------------------
नाही वीज नाही ढग झाला पोरका पाउस..
उंबर्यात अनाथ मरणाच्या झाला गर्भार पाउस ...
-----------------------------------------------
कुजबुजत्या नजरांतले
असंख्य शापित प्रश्न
नाकारलेली उत्तर
अन काळ, काम, वेगाच्या गणितात
मांडलेले ठोकताळे..
.
.
.
.
पांढर्या कपाळाच्या तारुण्याच
मातृत्व अस काळकुट्ट का?
--------------------------------------------------
भेगाळलेली रे धरती ओसाडले माळरान
थेंब थेंब पाण्यासाठी जीव पडतो गहाण
-----------------------------------------------------
तळ्व्याएवढ्या काळजाला , काळजी आभाळाच
असेल का रे त्यालाही ,खंत मावळ्ण्याची?
--------------------------------------------------
मुठीत बंद आभाळ
पिंजर्यात कैद वारा
हिरवागार वणवा
अन मृगजळाची तहान..
....
....
असाच काहीबाही बडबडायची म्हणे 'ती'..स्वप्नात..
....
...
८५% जळलेल्या 'ती'च्या सासरच्या डोळ्यात
झळकत होता स्पष्ट सुटकेचा निश्वास...
----------------------------------------
ऐलतीराचा पैल तीराशी संवाद नव्याने होऊ दे
----------------------------------------------
सुख झाले अळणी देवा दु:खाची तू चिमुट दे
साजर्या जगण्यास माझ्या तू काजळाची तीट दे
-----------------------------------------------
नाही वीज नाही ढग झाला पोरका पाउस..
उंबर्यात अनाथ मरणाच्या झाला गर्भार पाउस ...
-----------------------------------------------
कुजबुजत्या नजरांतले
असंख्य शापित प्रश्न
नाकारलेली उत्तर
अन काळ, काम, वेगाच्या गणितात
मांडलेले ठोकताळे..
.
.
.
.
पांढर्या कपाळाच्या तारुण्याच
मातृत्व अस काळकुट्ट का?
--------------------------------------------------
भेगाळलेली रे धरती ओसाडले माळरान
थेंब थेंब पाण्यासाठी जीव पडतो गहाण
-----------------------------------------------------
तळ्व्याएवढ्या काळजाला , काळजी आभाळाच
असेल का रे त्यालाही ,खंत मावळ्ण्याची?
--------------------------------------------------
मुठीत बंद आभाळ
पिंजर्यात कैद वारा
हिरवागार वणवा
अन मृगजळाची तहान..
....
....
असाच काहीबाही बडबडायची म्हणे 'ती'..स्वप्नात..
....
...
८५% जळलेल्या 'ती'च्या सासरच्या डोळ्यात
झळकत होता स्पष्ट सुटकेचा निश्वास...
----------------------------------------
No comments:
Post a Comment